Story

In the mid of the Aravali Mountains, shree Ranchod Rai Bhagwan Ked, Mallinath Bhagwan Tilliwada, Bhairavnath Nakoda, and devi Maa Somara Ashapura Grew a seed, which is now called Aainath Gaushala. WIth the Donations of Bhamashah, this Gaushala is also serving as Cow hospital. Deaf, Disabled Cows are treated here.

as Cow hospital. Deaf, Disabled Cows are treated here. Cows got damaged through accidents are brought to the hospital through the Ambulance services. Our Gaushala is well-equipped with modern technology. With all your blessings and donations, Aainath Gaushala is running successfully and touching sky.

हमारी कहानी

अरावली की सुरम्य पहाड़ियों के मध्य श्री रणछोड़ राय भगवन रोड मल्लिनाथ भगवन तिलवाड़ा भैरवनाथ नाकोड़ा व देवी माँ सोमरा आशापुरा की गोद मे एक बीज से पलकर बड़ा हुआ आज यह वट वृक्ष की तरह विशालकाय बड़ा रूप लिए आज यह बालोतरा के मध्य व दूसरी शाखा इसी शाख़ से १२ किमी दूर कलवा गाँव के पास बोरावास मे स्थित है

भामाशाहो के सहयोग से चल रही यह गौशाला आज गौ चिकित्सालय के रूप मे भी कार्य कर रही है साथ ही यहाँ अंधी विकलांग व निराश्रित गायों की सेवा की जाती है दुर्घटना ग्रस्त गौमाता को लेन हेतु एम्बुलेंस की सेवा उपलब्ध है आधुनिक तकनीकी सुबिधा यक्त यहाँ गौशाल आप सभी लोगो की सहायता से तीव्र गति से प्रगति की ओर अग्रसर हो रहा है

गौसाला स्थापना ३० जनवरी को साधु संतो के कर कमलो के दवरा की गयी जिनमे प्रमुख साधु संत श्री श्री १००८ ओंकार भारती जी महाराज मठाधीश परेउ, स्वामी प्रतापपुरी जी महाराज मठधीश तारातरा, संत श्री निरंजन भारती जी महाराज गंगागिरी मठ व अन्य कई साधु संतो की उपस्थिति में यह कार्य सम्पन हुआ। सेवा का कार्य चल ही रहा था तब दानदाताओ ने सेवा से मोहित होकर बीमार गौमाता हेतु एम्बुलेंस सुविधा हेतु राशि एकत्रित कर गौशाला को सुविधा रूप मे एम्बुलेंस प्रदान की।

एम्बुलेंस का उदघाट्न स्व श्री श्री १००८ संत शिरोमणी बाड़मेर की धरती के महादेव मोहनपुरी जी महाराज ने अपने कर कमलों से कर गौशाला परिवार को अपनी वाणी से उत्साहित कर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी इसी कड़ी मेहनत के चलते दानदाताओं मे द्वितीय वर्ष यानि एक वर्ष बाद ही दुसरी एम्बुलेंस भी दे दी गयी सेवा का दायरा १०० किमी व २०० किमी वृत मे रखा गया। आज यह कलावा गाँव की शोभा बनकर रह गया है पर्यटक स्थल की तरह यहाँ पर भी लोग बहुत दूर से आ रहे है।